ग़ज़ल

जून, 2026

रामस्वरूप मूंदड़ा
रामस्वरूप मूंदड़ा
रजत कॉलोनी,
बूंदी (राज)

बातों में जब खींचातानी।
कहना- सुनना है बेमानी।
वो आगे, हम पीछे कैसे,
सोच हमारी है बचकानी।
जैसा बोया, काटा वैसा,
फिर इसमें कैसी हैरानी।
जीती बाजी हार गए तो,
शर्म से होते पानी-पानी ।
वो ही न हो पाए अपने,
रक्खी जिनसे आना-कानी।
हाल छुपाकर हम अपनों के,
करते औरों की निगरानी।
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