दिसंबर, 2022

संपादक-हिन्दी-ज्योति, सम्बलपुर,
उड़ीसा
नए साल का आज है नया तपन
ले आया जोश भरा गगन।
उग आया है धरती में दूर-दूर
आशाओं से भरा नव अंकुर।
किरणों की झोली में आया सपना
रिश्ता कोई नया है माऩ अपना।
अहंकार, असत्य, बेईमानी को मिटा
आई है विश्वास, सत्य व ईमान की घटा।
क्यारी-क्यारी में जग रही है आशा
पाठ पुराने हैं पर नई हैं परिभाषा।
पहुंचे स्वर्णिम-प्रकाश कोना-कोना
आगे बढ़ते जाना है त्याग रोना-धोना।
अब भी बाकी है दिन-रात सपने बोना
बहुत कुछ है पाना, बहुत कुछ है खोना।
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