मस्ती भरा है समां

मार्च, 2024

अनूप कटारिया, मानसरोवर
जयपुर, राजस्थान

मस्ती भरा है समां, सीनियर सिटीजन हैं हम यहाँ
इस उम्र में आए हैं बुढ़ापे में समाएँ हैं
ऐसी मस्ती फिर कहाँ
मस्ती भरा ———-

बूढ़े सब यहाँ निराले हैं कोई गोरे कोई काले हैं
बूढ़े सब यहाँ निराले हैं
कोई मोटे कोई पतले हैं
देखे हैं जो सपने
उन्हें दुहराते हम यहाँ
मस्ती भरा ———–

हर एक के ठाठ निराले हैं
सब पोते – पोतियों वाले हैं
हर एक के ढंग निराले हैं
सबके अपने फ़साने हैं
मिलते हैं जब अपने
खूब खिलखिलाते हम यहाँ
मस्ती भरा ————

शैशव जवानी में खूब झूले हैं
वृद्धावस्था को हम भूले हैं
शैशव जवानी में खूब खेले हैं
वृद्धावस्था को हम भूले हैं
सब कहते हमें दीवाने
फिर भी हँसते हम यहाँ
मस्ती भरा ———–

सबने कई रोग पाले हैं
सबके दवाइयों के झोले हैं
आशाओं के तराने
मिलकर गाते हम यहाँ
मस्ती भरा ————

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