साठ के बाद का सफर

दिसंबर, 2024

डी. एन. पाठक, दिल्ली
साहित्यकार एवं समाजसेवी
(परिचय- आप वर्ष 2006 से जीवन ज्योति सेवा संस्था के अध्यक्ष हैं।)

साठ की दहलीज़ पर जब कदम बढ़ाए,
जीवन के अनुभव संग नयन मुस्काए।
बालों में चाँदी, पर मन जवां-सा,
कहानी नई लिखे, हर एक दिशा सा।

जीवन ने जो सिखाया, हर मोड़ पर साथ,
उस ज्ञान की पूंजी बने अब नई बात।
सेहत की चिंता अब और जरूरी,
हर दिन को जीना, है नई खुशबू की फेरी।

मन में उमंग हो, योजनाएं बनीं,
अपनों के संग, स्नेह की गहरी छवि तनी।
शौक पुराने हो या नया हो कोई सपना,
साठ के बाद भी, संजीवनी बने अपना।

सहेजें रिश्तों को, अनुभव का मेल,
बचपन की यादों संग करें सुख का खेल।
जग को कुछ दे जाएं, यही हो प्रयास,
हर दिन की यात्रा में हो आनंद का वास।

साठ की उम्र तो बस एक पड़ाव है,
सच्चे सुख की खोज का यह एक नया भाव है।
खुद से प्यार करें, ख्वाबों को साधें,
जीवन के इस यौवन को सुंदरता से बांधें।
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