पहचान हमारी हिंदी

मार्च, 2025

डॉ. सुमन धर्मवीर
विशाखापत्तनम
आंध्रप्रदेश

मधुर स्मृतियों को स्मृति चिन्ह बनाती प्यारी हिंदी।
हिंद की बिंदी हिंदी।
तिरंगे से सजी
जय हिंद के घोष से गूंजी
प्रकृति पूजा से
बांसुरी बजाती हिंदी।

विभिन्न बोलियों,
भाषाओं, संस्कृतियों,
सभ्यताओं
को संजोती
हमारी प्यारी हिंदी।

शस्त्र, शास्त्र क्रांति में बिफरी
देशभक्ति की मिसाल बनी
स्वतंत्रता आंदोलन की जान थी हिंदी।
आज भी आजादी को गढ़ती
भारतीयता की भावना से लिपटी प्यारी हिंदी।

भारत को जोड़ती हिंदी,
स्थानीय भाषाओं की बनी कड़ी।
चाची, ताई, बुआ, भतीजी, मौसी, भांजी, बनीं गुजराती, मराठी कन्नड़, तेलुगू, तमिल, मलयाली, आसामी
तो दादी, नानी बनी प्यारी हिंदी।

रंग बिरंगी पोशाकों से सजी
प्यारे-प्यारे सुहाने सपनों से गुंथी।
हर सुर ताल में बजती गाजे, बाजे, हर साज पर थिरकती हिंदी।

जिंदगी की थकान कम करती
दिमाग का तनाव कम करती
हिंदवासियोँ की जिंदगी सहज सरल बनाती प्यारी हिंदी।

ज्ञान विज्ञान तकनीक में उभरी हिंदी
चैट जीपीटी, कंप्यूटर, ए.आई, रोबोट,
बोले हिंदी।

मून मिशन पर प्रज्ञान रोवर से चांद पर पहुंची हिंदी।
विश्व में आदर भाव दिलाती हिंदी।
अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनने को खुद में अनंत संभावनाएं समेटे
हमारी प्यारी हिंदी।
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