रश्मि झा
जयपुर, राजस्थान
मार्च 2026
नव भारत की रमणी कामिनी
सृष्टि, शक्ति, जगत की आधार,
श्रृंगार सुसज्जित तू ललना
मान, सम्मान, संस्कृति व्यवहार।
अपने कर्तव्यों के संग
भर रही अनवरत उड़ान,
ना शिकवा ना शिकायत ना ललाट पे कोई थकान।
घर की चौखट लांघ चुकी वो,
अब सपनों को चमकाती है
नीति न्याय और शासन में
अपना लोहा मनवाती हैं।
खेतों से खलिहानों से
गाँवों की गलिया भी फ़तह किया,
संसद की गलियारों में
अपना परचम लहरा ही दिया।
रीति रिवाजों और रस्मों को निभाते
आजादी की उड़ान भरी,
सरहद की रक्षा में देखो
कैसे सीना तान खड़ी।
कंप्यूटर के कीबोर्ड से
अंतरिक्ष के तारों तक,
उसकी गूंज सुनाई देती उन चमकते सितारों तक।
वो माँ भी है जो संस्कार रोपती
बच्चों में राष्ट्र प्रेम भरे,
कभी सावित्री कभी झाँसी बनी
वो उद्यमी वैज्ञानिक भी
जो हर मुश्किल को सहज करे।
नारी तू शक्ति नारी तू प्रगति
तू राष्ट्र की सच्ची शान है,
इस नवनिर्मित भारत के
कण कण में
तुम्हारा भी जयगान है।
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