मार्च 2026

सिलीगुड़ी, प॰ बंगाल
(कवयत्री परिचय: लेखिका एवं समाजसेवी। बूँद बूँद सैलाब, पत्थर होने की जिद, रोशनी की दरारें, नेपथ्य के ज़ख्म, आशाओं का क्रंदन, इत्यादि इत्यादि पुस्तकों के अतिरिक्त साझा संग्रहों, पत्र-पत्रिकाओं और वैबसाइट पर अनवरत प्रकाशन। मंचीय प्रस्तुति।
नारी से निखरा देश, नारी उसकी शान,
उसके श्रम–संकल्प से, स्वर्णिम भारत–भान।
माँ बन संस्कार गढ़े, बेटी बन आधार,
नारी बढ़ती जब आगे, बढ़ता राष्ट्र अपार।
कलम, कुदाल, विज्ञान संग, नारी का विस्तार,
सीमा, संसद, अंतर में, उसका भी अधिकार।
घूंघट से गगन तलक, नारी की उड़ान,
उसके सपनों से लिख रहा, भारत नव विधान।
शक्ति, भक्ति, बुद्धि का, नारी संग मेल,
उसके बिना अधूरा, विकासों का खेल।
नारी जागी देश जागा, गूँजी नई हुंकार,
उज्ज्वल भारत रच रहा, नारी का सत्कार।
कंधों पर इतिहास है, आँखों में विश्वास,
नारी के साहस तले, मिटता हर अवसाद।
शिक्षा दीप जलाए वह, मिटता तम अंधकार,
ज्ञान–प्रज्ञा के पथ पर, बढ़े देश अपार।
श्रम की पूजा करती वह, थकती नहीं कभी,
संघर्षों की धूप में, बनती पारस सभी।
न्याय, नीति, निष्ठा का, नारी ही प्रमाण,
उसके दृढ़ संकल्प से, सुदृढ़ राष्ट्र महान।
जब नारी को अवसर मिले, खुले विकास द्वार,
उज्ज्वल भारत बन रहा, नारी का अधिकार।
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