पाती मन की

जून, 2026

डॉ वर्षा महेश
डॉ वर्षा महेश
आईआईटी बॉम्बे
पोवाई, मुंबई

सुनो लड़कियों!
ध्यान से सुनो… अपना आसमान खुद चुनो
तुम भावी पीढ़ी की प्रतिनिधि हो
सुनो वर्तमान पीढ़ी से एक कहानी
ज्ञात हो तुम्हे भी अतीत की बलिदानी
आज जिस सफ़र पर तुम निकली हो
मानो बादलों को चीर के कोई
धूप का टुकड़ा मुस्कुराया है
बड़ी मुश्किलें सहकर तुम्हारी पुरखिनों ने
तुम्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है
दादी -नानियों ने जी तोड़ घर के काम किए
छुप – छुप के किताबें पढ़ी कुछ अक्षर अपने नाम किए
साड़ी पहनकर माँएं कॉलेज गई
साइकिल के पैडल पर पैर जमाए
ताकि ये दुनिया थोड़ी तो समझ आए
नौकरी कर जीवन आसान बना लिया
परन्तु रोटी बनाना और रोटी कमाना
दोनों ही काम उनके हिस्से आ गया।
उफ्फ! घर और दफ़्तर की जिम्मेदारी में
उलझकर फूल सा चेहरा मुरझा आ गया
पर जब तुम सब इस दुनिया में आईं
उन्होंने एक नई रणनीति बनाई
घर का हर काम करेगी एक
फुल टाइम बाई
तुम्हें अब क्या करना है
खुशी से घर को भरा रखना है
तुम अब आज़ाद हो
अपने सपने बुनने के लिए
नित नवीन सफलताओं के
शिखर पर चढ़ने के लिए
बनके सहारे, हम हमेशा
पीछे खड़े हैं तुम्हारे।
बदले में बस इतना चाहते हैं कि
तुम बस एक अच्छी बेटी और एक
अच्छी बहु बनो
उस माँ को मत भूलो जिसने तुम्हे
इस काबिल बनाया है कि
तुम स्वयं को गढ़ सको
उस सास को भी मान दो
जो तुम्हारे दफ़्तर जाने पर मुस्कुराती है
तुम्हारे बच्चों पर अपना बुढ़ापा लुटाती है
तुम्हारी सफलता के लिए संघर्ष
करती ये स्त्रियाँ तुम्हारी विरासत हैं
इन्हें सहेजो! इनका सम्मान करो।
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