सितंबर 2026

बदल गई है बातों की भाषा,
बदल गया संवाद,
शब्द वही हैं, अर्थ नए हैं,
नया हुआ अंदाज़।
पहले चिट्ठी आती थी घर में,
मन की खुशबू लाती थी,
अब संदेशों की दुनिया में
दो पल में बात बताती है।
पर दोष नहीं इस पीढ़ी का,
वह भी नए रंग दिखलाती है,
भाषा भी तो समय के संग-संग
अलग रूप अपनाती है।
लेकिन इतना याद रहे बस,
शब्द भले ही नए हों,
अपनी बोली हो प्यार की भाषा,
दिल से निकली और अच्छी हो।
तकनीक रहे हाथों में अपने,
पर संस्कार न छूटें,
नयी भाषा के रंग सजें, पर
जड़ों से रिश्ते न टूटें।
नयी पीढ़ी की भाषा नयी हो,
नए विचारों का मान रहे,
दुनिया चाहे कितनी बदले,
दिल में अपना हिंदुस्तान रहे।
