
आज मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी बरसात की
तुमसे मिलने को आकुल
अधखुले मेरे ये नैन,
जल भरे हो जाते हैं
देख यह लम्बी काली रैन ;
मेरी सिसकियों में आज बसी है कोई चातकी ;
आज मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी बरसात की ।
उमड़ते-घुमड़ते बादलों में
बिजली कौंधती है बारबार ,
पलकें बिछाए बैठा हूँ
पर तुम नहीं आई इसबार ;
आहों में दूबकी कहानी है इस काली रात की
आज मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी बरसात की ।
खोजा था तुमको दशों दिशाओं में
तुम इतने समय कहाँ रही ,
सुनना जरा मेरी व्यथा
कुछ कही कुछ अनकही ;
याद करता हूँ मेरी साँसों में छुपी तुम्हारी बात की ;
आज मेरी प्रतीक्षा रिमझिम बनी बरसात की ।
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