दुर्व्यसन

kalpna jha
कल्पना झा
दिल्ली

मार्च 2026

सुनो युवाओं ध्यान लगाकर
गूढ़ वचन है जन-जन हितकर

रजनीगंधा पान मसाला
भरमाये बहलाये भाई

वसन दुर्व्यसन अति बलाय
जाकर ले क्षण में जाल बिछाय

पाश में जब ये लेता फांस
मिले न राह सब टूटे आश

रोओ कितना मन पछताओ
छूट न पाओगे अथक प्रयास
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