दिसंबर, 2025

दिल्ली
मेरा एक बेटा और एक बेटी है
सोच रहा हूँ….
दोनों की शादी समय पर करा दूँ
इसी के साथ समाज में
एक नयी परंपरा चला दूँ
इश्तेहार…1
अपने बेटे के लिये
एक वधु चाहिए
कोइ गे या लेस्बियन नहीं
संपूर्ण लड़की ही होनी चाहिए
देखने में हो ऐसी
मेरा बेटा हो जाय लट्टू
अदा उसकी ऐसी हो
पति बन जाय टट्टू
स्वभाव से नम्र हो
या हो बत्तमीज
पहने वो साड़ी
या पहने पैंट-कमीज
चाहे तो घर को सजाए
मर्जी हो घर में आग लगाए
इच्छा हो तो खाना बनाये
या रमी खेलकर समय बिताए
हो नौटंकीबाज…
वो भी चलेगी
चिल्लाये वो दिनभर
मेरी क्या बिगाड़ लेगी
जिस लड़की के बाप को पसंद हो
मेरे बेटे संग रचा लो बेटी की सगाई
शर्त एक ही है…..
मेरे बेटे को रखना होगा
बनाकर घरजमाई
इश्तेहार …2
बेटी के लिए एक वर चाहिए
कोई पहलवान टाइप नहीं
सुंदर सजीला राजकुंवर चाहिए
पढ़ा-लिखा जैसा भी हो
हो पूंजीपति और कमाऊ
इमानदार नहीं…
भले हो बिकाऊ
जो भी कमाकर लाये
मेरी बेटी को पकड़ाये
वो कहाँ पैसा उड़ाई
इसका हिसाब न लगाए
मेरी बेटी की हाँ में हाँ मिलाये
कभी वो चिल्लाए नहीं
बस गिड़गिड़ाए
माँ-बाप को भूलकर
अपनी सास के सामने सर झुकाये
एक शर्त और….
वही लड़का संपर्क करे
जो घरजमाई बनकर साथ रहे
न बेटी को सास की चिंता
न ही सास बहु के साथ
चिक-चिक करेगी
बेटी रहेगी माँ के साथ
फिर कौन किसकी शिकायत करेगी
समाज में एक विचार की
आंधी चल रही है
माँ-बाप की सेवा
बेटे से ज्यादा बेटी कर रही है
मैं पूछता हूँ….
यही बेटी तो
बहु बनकर ससुराल जाती है
क्या बहु चाँद या मंगल ग्रह से आती है
सास-ससुर को साथ रखना फर्ज़ नहीं
अपनी माँ रहे साथ तो हर्ज नहीं
भाई को…
पत्नी की गुलाम बताएगी
लेकिन खुद….
अपने पति को अंगुली पर नचाएगी
माँ- बाप की सेवा के लिये
भाई को पाठ पढाएगी
लेकिन खुद…
सेपरेट रहने के लिए
सास– ससुर को वृद्धाश्रम में बिठाएगी
तो क्यों न बेटी…
माँ के ही साथ रह ले
जितनी मर्जी हो
आपस में बात कर ले
मन भरकर सेवा कर ले
जब लड़ने का दिल करे
माँ – बेटी आपस में ही लड़ ले
ना ही सास बहू को जलाएगी
ना ही बहू झूठे डोमेस्टिक वायलेंस का केस दर्ज कराएगी
घर घर में शान्ति ही शांति नजर आएगी
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