इस दर्द को ही हमदर्द बनाने है
राम- नाजायज़ यूँ तो ज़िन्दगी जीने के कई बहाने है, कुछ हकीकत है तो कुछ फसाने है। रोज नए जख़्मों
राम- नाजायज़ यूँ तो ज़िन्दगी जीने के कई बहाने है, कुछ हकीकत है तो कुछ फसाने है। रोज नए जख़्मों
मातबर क़लम किसी आईना से कम नहीं होता। बेलाग चेहरा सत्ता का हमदम नहीं होता॥ शान से रखते हैं लोग
राजधानी में बरस भर से ज्यादा चला खेती-किसानी के नाम वाला आंदोलन खत्म हुआ तो तंबू-कनात उखड़ने लगे। सड़क खुल
राधा प्राइवेट स्कूल की शिक्षिका थी, अपने काम से मतलब रखने वाली, किसी से भी बहुत ज्यादा बातें नहीं करती
सत्तर वर्षीय शन्नो देवी चुपचाप अपने कमरे में लेटी लगातार छत पर लगे पंखे को घूर रही है। उसके अंदर,
प्रकाश जब आज दफ्तर से लौटा तो उसके साथ उसके स्वर्गवासी पिता के दोस्त डॉक्टर दिनेश चन्द्र भी साथ में
नदियों की संस्कृति अच्छी है। वह बहती है दो किनारों को साथ लेकर वो हमारे लिए तैयार करती जाती है
नारी से संसार है, नारी में संसार। नारी ही संसार है, नारी ही है प्यार।। सृष्टि में नारी तत्व महान्।
माँ प्यारी माँ! तुम मेरी प्रथम पाठशाला हो तुम्हीं मेरी आदर्श हो तुम्हीं मेरी गुरू हो सब कुछ तो मैने
माँ अब फुर्सत में है दूध की बोतल और पालने के बीच भागने वाली माँ अब फुर्सत में है स्कूल
प्रिय वसंत, पिछली बार जब तुम लौटे थे या तो भूल गए थे या फिर जान कर तुम सुलगते हुए
चँदा मामा से बच्चों का नाता सदा। सारे बच्चों को चँदा लुभाता सदा। चाँद को बाल्टी में पकड़ता है वो।
मानव और प्रकृति के बीच बहुत गहरा सम्बन्ध है। मानव प्रकृति का एक अभिन्न अंग है। प्रकृति के बगैर मानव
“होली” शब्द में ही होली की विशेषता समाहित है। होली शब्द में चार वर्णों का योग है- ह+उ+ल+ई। ह=हर्ष, उ=उल्लास,
वृद्धावस्था का भय केवल आज की समस्या नहीं है बल्कि हजारों वर्ष पहले रचित आयुर्वेद ग्रंथ चरक संहिता में भी
हम सब जब अपने जीवन-चक्र की एक अवस्था (स्टेज) से बढ़ते हुए दूसरी अवस्था में प्रवेश करते हैं, तब हमारे
बुजुर्गों में होने वाली सामान्य मनोवैज्ञानिक समस्याएँ Read Post »
वृद्धावस्था में प्रायः ऐसा देखने मे आता है कि अपनी जरूरत की हर छोटी-बड़ी चीज के लिए दूसरों पर निर्भरता
प्रतिवर्ष 8 मार्च को ‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2022 के लिए इस दिन की थीम ‘Break The
एक असुर की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे सम्पदा और वैभव देना चाहा। लेकिन उस असुर ने यह
सुप्रसिद्ध कवि श्री हरिवंश राय बच्चन ने क्या खूब कहा है ‘बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं गुब्बारों में
चौरासी वर्ष की आयु में एक ऐसा साहित्यकार जिन्होंने भोजपुरी में ‘करुनाकर रामायन’ (करुणाकर रामायण) सहित भोजपुरी और हिन्दी में
भोजपुरी में रामायण के रचयिता पं0 व्रतराज दुबे ‘विकल’ से साक्षात्कार Read Post »
दिलीप कुमार ‘यूँ ही बेसबब ना फिरा करो’ ‘परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आइने में
पुस्तक: मोहपाश लेखिका: डॉ शेफालिका वर्मा समीक्षक: अनीता मिश्रा मोह पाश! मोह पाश! मोह पाश! दिल के सागर में भावों