अभिमान क्यों? किसलिए? किसका?
दिसंबर, 2024 यह संसार नश्वर है अतः यहाँ किसी का कुछ नहीं यानि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना
दिसंबर, 2024 यह संसार नश्वर है अतः यहाँ किसी का कुछ नहीं यानि अपना होता हुआ भी, कुछ भी अपना
दिसंबर, 2024 कुछ लोग, विशेष रूप से बढ़ती उम्र में कहते हैं कि उनकी याददाश्त बड़ी ख़राब है और वे
याददाश्त को ठीक बनाए रखने के लिए अनिवार्य है मानसिक सक्रियता (जीने की कला) Read Post »
दिसंबर, 2024 नहीं जरूरत बुजुर्गों की हर बच्चा बुद्धिमान बहुत हैl उजड़ गए सब बाग बच्चे बगीचे, दो गमले में
दिसंबर, 2024 “हो गए हम साठ के तो क्या हुआ दिल तो बच्चा ही हमारा है अभी” जिस प्रकार हमने
दिसंबर, 2024 हम सभी बाल्यावस्था, शैशवावस्था, प्रौढ़ अवस्था और वृद्धावस्था में प्रवेश करते हैं। किंतु पता नहीं जब तरुणाई की
बबीता झा रोज़ की तरह आज भी मेरी नींद सुबह 6 बजे खुल गई। बेटे और बहू थोडा देर से
दिसंबर, 2024 मित्रों! साठ साल की उम्र के पड़ाव का अपना एक ठाठ होता है। न सुबह जल्दी उठ तैयार
बबीता झा दिसंबर, 2024 एक नदी में बहुत सी मछलियाँ रहती थीं। उनमें तीन मछलियाँ आपस में बहुत गहरी मित्र
वृद्धावस्था की पूर्व-तैयारी और ‘दीर्घसूत्री’ का पाठ Read Post »
सितंबर, 2024 सारी दुनिया की माँ अच्छी पर अपनी माँ अपनी होती, तुम हँसते हो तो वो हँसती तुम रो
सितंबर, 2024 मान है अभिमान हिंदी बन गई पहचान हिंदी विश्व को अब भान है कि भारत माँ के प्राण
सितंबर, 2024 हिन्दी ने जोड़ा सबको, वसुधैवकुटुंब बनाया है हिन्दी ने सारे जग में, अपना ध्वज फहराया है। कहलाती वैज्ञानिक
सितंबर, 2024 हमारा हो निज भाषा पर अधिकार, प्रयोग हिंदी का, करें इसका विस्तार। निज भाषा निज उन्नति का कारक,
सितंबर, 2024 हिंदी भाषा से हर्षित, हृदय का हर द्वार दोस्तों कोशिका से तरंगित, स्नेह उदगार दोस्तों।। निज भाषा पर
सितंबर, 2024 जीवन में गुल्लक का होना भी ज़रूरी है एक गुल्लक रिश्तों की एक गुल्लक दोस्तों की एक गुल्लक
सितंबर, 2024 (यह संदीप श्रीवास्तव जी की अंतिम रचना है। अभी हाल में ही उनका निधन हुआ है। यह रचना
सितंबर, 2024 हर डग चलने को आतुर मन चलता है, चलता जाता है। हर पल पलता एक सपना सा पलता
सितंबर, 2024 हाथों की लकीरों को हाथों में रहने दे, है मंजूर, तकदीर को जो होने दे, मुकद्दर से जो
सितंबर, 2024 इस घर में इतना क्लेश क्यों है? इस घर में इतनी कलह क्यों है? इस घर में अपनी-अपनी
सितंबर, 2024 मैं घुड़सवारी करता हूँ मगर ये पिता की पीठ जैसी उस सवारी सी कहाँ पिताजी तीन टांग का
सितंबर, 2024 संस्कृत की मैं आत्मजा और हिंद की मैं लाडली सुवास मैं सबके हृदय की, विश्वास की अधखिली कली
सितंबर, 2024 अपनी भाषा! अपनों की भाषा सपनों की भाषा, अपने सपनों की भाषा माँ की भाषा, ममता की भाषा!
सितंबर, 2024 भारत संघ की सर्वमान्य, राजभाषा है हिंदी। केवल संवैधानिक नहीं, गर्व की भाषा है हिंदी। चौदह सितंबर राष्ट्रीय
सितंबर, 2024 भारत के उज्ज्वल माथे की। मैं ओजस्वी बिंदी हूँ। मैं हिंद की बेटी हिंदी हूँ। संस्कृत, पाली, प्राकृत,
सितंबर, 2024 कहती है मैं कृति तुम्हारी जब से रस भीगी संध्या को मैंने मन से प्यार किया है; तब
सितंबर, 2024 जमीं पर रहकर आसमां जीत लें। हौसला हो इतना कि रास्ता जीत लें। सपनों में अपने इतने पंख
कामेश्वर चौधरी, दिल्ली सितंबर, 2024 गीत से भर दो गगन को ताकि दुनिया झूम जाए। शोर में डूबी हवा की
बबीता झा सितंबर, 2024 “याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा। जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ,
सितंबर, 2024बबीता झा लगभग 500 सदस्यों की एक विशेष जूरी ने एक ऐतिहासिक मुकदमे पर विचार किया और अभियुक्त को
सुकरात: जिन्होने मृत्यु का भी हर्ष से स्वागत किया। (प्रेरक व्यक्तित्व) Read Post »
बबीता झा सितंबर, 2024 एक समय की बात है, एक समुद्री जहाज़ भयंकर तूफ़ान में फँस गया। कप्तान के अनगिनत
सितंबर, 2024 एक साहित्यकार पिता ने अपनी पुत्री से कहा- “बिटिया सुनो तो।” “हाँ, पापा क्या हुआ?” एक छोटी सी
सितंबर, 2024 पुरानी एक कहावत है कि, ‘चल गई सो चल गई’ बापू बताया करते थे कि, “एक भिखारी बहुत
सितंबर, 2024 मातृभाषा है अपनी शान, हिन्दी स्वीकार करें। हिंदी हिन्द की है पहचान हिंदी जयकार करें। हिंदी को क्यों
सितंबर, 2024 भूषण खाना खाकर उठा। सोफे पर बैठकर मोजे को पहनने लगा। सुखिया समझ गयी कि आज उसे ड्यूटी
सितंबर, 2024 शहर की झोपड़पट्टी माने वाले इलाके का नाम इंद्र पुरी था। अपने नाम के उलट मुर्गी के दड़बों
सितंबर, 2024 “बुढ़ापा यकीन मानिए एक अच्छी और सुखद चीज है, यह सच है कि आपको धीरे से मंच से
सितंबर, 2024 अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान अथवा आभार प्रकट करने का एक तरीक़ा है श्राद्ध। निस्संदेह हमें उनका
श्राद्ध से भी ज़रूरी है वृद्धजनों का उचित सम्मान और उनकी पर्याप्त देखभाल Read Post »
सितंबर, 2024 भारत की संपर्क भाषा हिंदी निसंदेह भारत की संपर्क भाषा हिंदी है क्योंकि जब हम अपने भावों को
सितंबर, 2024 भाषा भावों और विचारों की संवाहक होती है। भाषा का स्वरूप निरंतर बदलता रहता है। वर्तमान हिंदी का