Author name: बबीता झा

संपादकीय

भाषा का अस्तित्व, संस्कृति का संवर्धन और भाषाओं का क्षरण

बबीता झा सितंबर, 2024 एक समय की बात है, एक व्यापारी का पुत्र अत्यंत कम आयु में ही व्यापार करने

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आलेख

पर्यावरण की वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति

जून, 2024 मानवीय सभ्यता आज अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से गुजरती प्रतीति हो रही है। यह संकट प्राकृतिक कम

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आलेख

शिशु को गर्भ में ही दे सकती हैं अच्छे संस्कार

जून, 2024 सुबह सुबह अखबार में किशोरों द्वारा अपराध की खबरें देखकर सरिता जी का मन खिन्न हो गया। गंभीरता

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आलेख, बस यूँ ही...

कैसे दिए जाएँ बच्चों में संस्कार?

बबीता झा जून, 2024 तरुण एक पारिवारिक व्यक्ति थे। शाम को कार्यस्थल से जल्दी घर लौटना, परिवार के साथ समय

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आलेख, बस यूँ ही...

संस्कार क्या है और क्यों आवश्यक है?

बबीता झा जून, 2024 आधुनिक जीवन की त्रासदियाँ: केस स्टडीज़ प्रभा जी (65 वर्ष): विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मायके

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आलेख

आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटते संस्कार

जून, 2024 “एक सोलह वर्ष के किशोर ने शराब पीकर गाड़ी से एक दंपति एवं उनके पांच वर्ष के छोटे

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संपादकीय

शिशुपाल की कथा और अभिभावक का दायित्व

बबीता झा जून, 2024 श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ा एक अत्यंत प्रसिद्ध प्रसंग उनके बुआ के पुत्र (फुफेरे भाई) शिशुपाल

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छन्द और लय

सुनो-सुनाओ हमको भैया

मार्च, 2024 सुनो-सुनाओ हमको भैया,बातें प्यारी -प्यारी। घर आंगन में नित-नित गूंजे, बच्चों की किलकारी। हम छोटों पर रौब जमाना

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छन्द और लय

तुम्हारा अपना मधुमास! (मधुमास का संदेश नारियों के नाम)

मार्च, 2024 कहां खोई? क्या ढूंढ रही? तुम किन बातों से टूट रही? खिलखिलाओ जैसे अमलतास! लो आ गया मैं,

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किस्सागोई

विगनेला गाँव की प्रेरक गाथा: जब ग्रामीणों ने बनाया अपना ‘कृत्रिम सूर्य’ (प्रेरक कहानी)

मार्च, 2024बबीता झा दुनिया में अनेक बड़े-बड़े वैज्ञानिक प्रयोग और आविष्कार हुए हैं तथा वर्तमान में भी कई विशाल वैज्ञानिक

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किस्सागोई

दुर्गाबाई देशमुख: संघर्ष, संकल्प और समाज सुधार की अमर गाथा (प्रेरक व्यक्तित्व)

मार्च, 2024 एक ऐसी महिला, जिनके बचपन में ही पिता का साया उठ गया, कम आयु में विवाह कर दिया

दुर्गाबाई देशमुख: संघर्ष, संकल्प और समाज सुधार की अमर गाथा (प्रेरक व्यक्तित्व) Read Post »

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