Author name: बबीता झा

आलेख

तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु अर्थात् मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो (जीने की कला)

दिसंबर, 2023 यदि किसी घाटी अथवा किसी बड़े से कमरे में हम कुछ बोलते हैं तो वो आवाज वहाँ गूँजने

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आलेख

आधुनिकता की आड़ में बढ़ते वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023 भारत प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक रूप से एक समृद्ध और सहिष्णु देश रहा है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’,

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आलेख

कन्या पूजन और श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023 भारत विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक नींव पर खड़ा देश है। किंतु आज हमारे समाज का

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आलेख

वृद्धावस्था, संतान और वर्तमान

दिसंबर, 2023 वर्तमान में गाँव तीव्र गति से शहरों में परिवर्तित हो रहे हैं और शहर महानगरों (मेट्रो सिटी) में।

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आलेख, बस यूँ ही...

घटते मूल्य: बढ़ते वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023 बबीता झा कुछ दिन पूर्व मित्रों के साथ एक निःशुल्क वृद्धाश्रम जाने का सुअवसर मिला। यह एक ऐसा

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आलेख

कन्या पूजन और श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम!

दिसंबर, 2023 यह विषय वास्तव में अत्यंत गंभीर और परमावश्यक है। हम सभी को इस बात पर गहन चिंतन करने

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आलेख

श्रवण कुमार के देश में वृद्धाश्रम

दिसंबर, 2023 मित्रों! घर के बड़े बुजुर्ग परिवार की धुरी माने जाते हैं परंतु यह देख, सुनकर दुःख होता है

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संपादकीय

प्रकृति का नियम और वृद्धावस्था का सहज स्वीकार

दिसंबर, 2023 प्रिय पाठकों, नमस्कार! यह कथा सत्य है, काल्पनिक है या सांकेतिक—मुझे नहीं पता; किंतु सुना है कि हज़ारों

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छन्द और लय

एक किरदार हिंदी …. (14 सितंबर हिंदी दिवस)

सितंबर, 2023 मैं कहानीवाला हूँ। मैंने आज सोच लिया हिंदी एक किरदार है और अपनी किरदार से मिलने चला आया।

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किस्सागोई

गिलास रख दीजिए (प्रेरक कहानी)

सितंबर, 2023बबीता झा एक प्रोफेसर ने अपने छात्रों को एक प्रयोग करने के लिए कहा। उन्होने पानी भरा हुआ गिलास

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किस्सागोई

रोशन का पंद्रह अगस्त (बाल कहानी)

सितंबर, 2023 आज दोपहर को जैसे ही छुट्टी की घंटी बजी, बच्चे प्रेयर स्थल में पंक्तिबद्ध खड़े हुए। एक-एक करके

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आलेख, बस यूँ ही...

हिन्दी दिवस की सार्थकता: उपलब्धियाँ और व्यावहारिक चुनौतियाँ

सितंबर, 2023बबीता झा एक और हिन्दी दिवस आया और चला गया। प्रतिवर्ष की भाँति लोगों ने हिन्दी की विशेषताओं का

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आलेख

औरों के साथ-साथ अनिवार्य है स्वयं का विकास भी (जीने की कला)

सितंबर, 2023 “कर्तव्य से यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि कोई व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं को नष्ट कर ले और

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धरोहर, बस यूँ ही...

श्वेत क्रांति के जनक: डॉ. वर्गीज़ कुरियन

सितंबर, 2023 26 नवंबर 1921 को वर्तमान केरल (जो उस समय मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आता था) के कालीकट यानी

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आलेख

विचार संप्रेषण की आजादी (स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष)

सितंबर, 2023 अनेक विविधताओं से भरा भारत अपनी ‘अनेकता में एकता’ के लिए जाना जाता है। यही भावात्मक एकता देश

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आलेख

राष्ट्र उत्थान के लिये संकल्पित होने का आह्वान (स्वतन्त्रता दिवस पर विशेष)

सितंबर, 2023 आपके द्वारा प्रस्तुत यह देशप्रेम, सामाजिक दायित्व और ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के पंच-सूत्रों पर आधारित विस्तृत आलेख

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