धरोहर

ग़ज़ल का ‘अंदाज़-ए-बयाँ’: उर्दू शायरी के अमर स्तंभ मिर्ज़ा ग़ालिब

बबीता झा दिसंबर, 2024 “रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल, जब आँख ही से न टपका तो फिर

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आलेख

स्वास्थ्य ही परम धन

बबीता झा दिसंबर, 2024 “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” — महाकवि कालिदास (‘कुमारसंभवम्’) (अर्थात्: शरीर ही धर्म (और जीवन के समस्त कर्तव्यों)

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आलेख

समाज में अव्यवस्थित जीवन और परिवार का अनुसरण कितना उचित और कितना अनुचित है।

दिसंबर, 2024 जिस तरह से हमारे शरीर की सबसे छोटी इकाई कोशिका है, हजारों कोशिकाओं से मिलकर उत्तक का निर्माण

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आलेख

याददाश्त को ठीक बनाए रखने के लिए अनिवार्य है मानसिक सक्रियता (जीने की कला)

दिसंबर, 2024 कुछ लोग, विशेष रूप से बढ़ती उम्र में कहते हैं कि उनकी याददाश्त बड़ी ख़राब है और वे

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आलेख

स्वीट सिक्सटी: 60 की उम्र के लिए मेरी तैयारी

दिसंबर, 2024 “हो ग‌ए हम साठ के तो क्या हुआ दिल तो बच्चा ही हमारा है अभी” जिस प्रकार हमने

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आलेख

60 की उम्र के बाद मेरी तैयारी

दिसंबर, 2024 हम सभी बाल्यावस्था, शैशवावस्था, प्रौढ़ अवस्था और वृद्धावस्था में प्रवेश करते हैं। किंतु पता नहीं जब तरुणाई की

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संपादकीय

वृद्धावस्था की पूर्व-तैयारी और ‘दीर्घसूत्री’ का पाठ

बबीता झा दिसंबर, 2024 एक नदी में बहुत सी मछलियाँ रहती थीं। उनमें तीन मछलियाँ आपस में बहुत गहरी मित्र

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किस्सागोई

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’: ओज, वीरता और राष्ट्रीय चेतना के अमर ध्वजवाहक (हमारे साहित्यकार)

बबीता झा सितंबर, 2024 “याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा। जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ,

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किस्सागोई

सुकरात: जिन्होने मृत्यु का भी हर्ष से स्वागत किया। (प्रेरक व्यक्तित्व)

सितंबर, 2024बबीता झा लगभग 500 सदस्यों की एक विशेष जूरी ने एक ऐतिहासिक मुकदमे पर विचार किया और अभियुक्त को

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किस्सागोई

जो होता है अच्छे के लिए होता है! (प्रेरक कहानी)

बबीता झा सितंबर, 2024 एक समय की बात है, एक समुद्री जहाज़ भयंकर तूफ़ान में फँस गया। कप्तान के अनगिनत

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