हिंदी भाषा: भारतीयता की भाषा
सितंबर, 2024 मातृभाषा है अपनी शान, हिन्दी स्वीकार करें। हिंदी हिन्द की है पहचान हिंदी जयकार करें। हिंदी को क्यों
सितंबर, 2024 मातृभाषा है अपनी शान, हिन्दी स्वीकार करें। हिंदी हिन्द की है पहचान हिंदी जयकार करें। हिंदी को क्यों
सितंबर, 2024 भूषण खाना खाकर उठा। सोफे पर बैठकर मोजे को पहनने लगा। सुखिया समझ गयी कि आज उसे ड्यूटी
सितंबर, 2024 शहर की झोपड़पट्टी माने वाले इलाके का नाम इंद्र पुरी था। अपने नाम के उलट मुर्गी के दड़बों
सितंबर, 2024 “बुढ़ापा यकीन मानिए एक अच्छी और सुखद चीज है, यह सच है कि आपको धीरे से मंच से
सितंबर, 2024 अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान अथवा आभार प्रकट करने का एक तरीक़ा है श्राद्ध। निस्संदेह हमें उनका
श्राद्ध से भी ज़रूरी है वृद्धजनों का उचित सम्मान और उनकी पर्याप्त देखभाल Read Post »
सितंबर, 2024 भारत की संपर्क भाषा हिंदी निसंदेह भारत की संपर्क भाषा हिंदी है क्योंकि जब हम अपने भावों को
सितंबर, 2024 भाषा भावों और विचारों की संवाहक होती है। भाषा का स्वरूप निरंतर बदलता रहता है। वर्तमान हिंदी का
सितंबर, 2024 हिंदी भाषा न केवल भारत की पहचान है, बल्कि यह हमारे सांस्कृतिक धरोहर की सजीव अभिव्यक्ति भी है।
सितंबर, 2024 राजू की पंतग हवा में ऊंची उड़ रही थी। उसने पास खड़े दादा जी से कहा “देखिये दादा
बबीता झा सितंबर, 2024 एक समय की बात है, एक व्यापारी का पुत्र अत्यंत कम आयु में ही व्यापार करने
भाषा का अस्तित्व, संस्कृति का संवर्धन और भाषाओं का क्षरण Read Post »
जून, 2024 मानवीय सभ्यता आज अपने अस्तित्व के गंभीर संकट से गुजरती प्रतीति हो रही है। यह संकट प्राकृतिक कम
जून, 2024 एक बनें हम, नेक बनें हम, संगठित हों नारा है। सबसे अच्छा, सबसे प्यारा, भारत देश हमारा है॥
जून, 2024 किसे कहूं सुनेगा कौन? किसे समझाऊं समझेगा कौन? तड़प रहे हैं स्वार्थ की व्यथाओं में जल रहे है
जून, 2024 सुबह सुबह अखबार में किशोरों द्वारा अपराध की खबरें देखकर सरिता जी का मन खिन्न हो गया। गंभीरता
बबीता झा जून, 2024 तरुण एक पारिवारिक व्यक्ति थे। शाम को कार्यस्थल से जल्दी घर लौटना, परिवार के साथ समय
बबीता झा जून, 2024 आधुनिक जीवन की त्रासदियाँ: केस स्टडीज़ प्रभा जी (65 वर्ष): विवाह के पश्चात उन्होंने अपने मायके
जून, 2024 “एक सोलह वर्ष के किशोर ने शराब पीकर गाड़ी से एक दंपति एवं उनके पांच वर्ष के छोटे
बबीता झा जून, 2024 श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ा एक अत्यंत प्रसिद्ध प्रसंग उनके बुआ के पुत्र (फुफेरे भाई) शिशुपाल
मार्च, 2024 डॉ. राजीव गुप्ता हम हैं तेरे आप हमारे, इक-दूजे के बने सहारे। मन में हों मजबूत इरादे हर
मार्च, 2024 कितना सुंदर जीवन है यह इस जीवन का जश्न मनाएं कितने सुंदर धरती-अंबर स्नेह-प्रेम से मिलकर गाएं। रिस्तों
मार्च, 2024 चलते ही रहना चाहिए वक्त कैसा भी हो बस चलते ही रहना चाहिए हो कठिन चाहे डगर, बढ़ते
मार्च, 2024 जीवन की सुंदर बगिया में हम बीज खुशी के बो देंगे, फसलें झूमेंगी खुशियों की हम हंसते हंसते
मार्च, 2024 छोडें हम टकराव अहम् का एक समन्वय दीप जलाएं। वृद्ध धरोहर हैं समाज की उनके सिर पर ताज
मार्च, 2024 तोड़ निराशा के बंधन को बनेंगे आशावादी मुखड़ा तोड़ निराशा के बंधन को, बनेंगे आशावादी। सी एल एफ
मार्च, 2024 आओ! जीवन का जश्न मनाएं, मोहिनी सरगम हम गुनगुनाएं। हौसलों का लेकर कारवां हां, हम भी किसी के
मार्च, 2024 जाऐंगे जाऐंगे हम जाऐंगे सीएलएफ़ हम जाएंगे हाथों में लेके मशाल पूछने बुजुर्गों का हाल।। हम जाएंगे जाएंगे
मार्च, 2024 मुखड़ा हंसते गाते चल हो यारा , हंसते गाते चल। हाथों में हाथ दे के सबको लेके चल।
मार्च, 2024 खुशियों का दीप जलाएँ। सीएलफ संग जुड़ जाएँ।। जीवन का अंतिम चरण हो सुखमय। वृद्धों पर प्यार लुटाएँ।
मार्च, 2024 जीवन में लाने को इक नई बहार, CLF आया है आपके द्वार, बेशक जीवन की है ये दूसरी
मार्च, 2024 माता-पिता के चरणों मे संसार है, वृद्धजनों की सेवा ही संस्कार है….२ न जाने उसने, कितने जुल्मों सितम
मार्च, 2024 जीवन पेड़ को सींचा हमने कर्मों से नित फूल खिले। अनुभव के फल देखकर हमने नई पीढ़ी के
मार्च, 2024 सुनो-सुनाओ हमको भैया,बातें प्यारी -प्यारी। घर आंगन में नित-नित गूंजे, बच्चों की किलकारी। हम छोटों पर रौब जमाना
मार्च, 2024 मस्ती भरा है समां, सीनियर सिटीजन हैं हम यहाँ इस उम्र में आए हैं बुढ़ापे में समाएँ हैं
मार्च, 2024 जीवन मिलता एक ही बार नहीं मिलता कई बार _2 जी लो इसको हंस हंस कर छोड़ो बाकी
मार्च, 2024 भोर भई तो सब मुस्काएं साँझ हुई तो क्यों घबराएं जो कुछ पाया कर दे अर्पण राम नाम
मार्च, 2024 चलो फिर गीत गाते हैं, जरा फिर मुस्कुराते है, है तन का जोर बेशक कम, उमंगो को जगाते
मार्च, 2024 वसन्त ऋतु की रातों में, ढूंढूं अजब ठिकाने को, याद में उसकी खोया रहता, कौन सुने अफ़साने को,
मार्च, 2024 माह फरवरी आतुर है मन, धरा प्रेम बरसाई, सुरभित गुलाब की पंखुड़ियाँ, शूल मध्य इठलाती। देख दृश्य पुलकित