बसंत अगली बार आना
मार्च, 2024 मुझे पता भी नहीं चलता कब आया बसंत कब खिल गए फूल पलाश के मेरी पहचान करने की
मार्च, 2024 मुझे पता भी नहीं चलता कब आया बसंत कब खिल गए फूल पलाश के मेरी पहचान करने की
मार्च, 2024 शारदा की वीणा की बहती तरंग में बोल है उसके जो गूंजे उमंग में। पीत रंग धरे इस
मार्च, 2024 वसंत जैसी होती हैं स्त्रियाँ जो कदम रखते ही बीहड़ को भी कर देती हैं उपवन बना देती
मार्च, 2024 कहां खोई? क्या ढूंढ रही? तुम किन बातों से टूट रही? खिलखिलाओ जैसे अमलतास! लो आ गया मैं,
तुम्हारा अपना मधुमास! (मधुमास का संदेश नारियों के नाम) Read Post »
मार्च, 2024 राजेश्वर वशिष्ठ तुम्हें याद कर रहा हूँ; जैसे मैंने कभी नहीं याद किया चाँद को। तुम्हें देख रहा
मार्च, 2024 चाव से सजाया निज आँगन वसुंधरा ने, जान घर आज अब ऋतुराज आये हैं। बैठा डालियों पे छिप
मार्च, 2024 कितना मुश्किल होता होगा सुबह से उठ कर सबके लिए चाय नाश्ते की व्यवस्था फिर पति और बच्चों
मार्च, 2024बबीता झा दुनिया में अनेक बड़े-बड़े वैज्ञानिक प्रयोग और आविष्कार हुए हैं तथा वर्तमान में भी कई विशाल वैज्ञानिक
विगनेला गाँव की प्रेरक गाथा: जब ग्रामीणों ने बनाया अपना ‘कृत्रिम सूर्य’ (प्रेरक कहानी) Read Post »
मार्च, 2024 एक ऐसी महिला, जिनके बचपन में ही पिता का साया उठ गया, कम आयु में विवाह कर दिया
दुर्गाबाई देशमुख: संघर्ष, संकल्प और समाज सुधार की अमर गाथा (प्रेरक व्यक्तित्व) Read Post »
मार्च, 2024 नजर बचाकर निकलना ही चाहता था कि बड़े मियां आकर सामने खड़े हो गये। मैंने झुककर अदब से
मार्च, 2024 डॉ. भूपेन्द्र ‘अलिप’ “तोड़ती पत्थर’ के रचनाकार कौन हैं?” शिक्षक ने ग्यारहवीं वर्ग में पढ़ने वाली उन सारी
मार्च, 2024 उस आदमी ने पूछा, “तुम गलियों में क्यों फिर रही हो?” गाय बोली, “मैं अपने चारे की तलाश
मार्च, 2024 पापा बहुत ख़ुश थे कि उनका बेटा विदेश में अच्छी तरह से सैटल हो गया था। बेटे ने
मार्च, 2024 “एक ही घर में अब एक साथ रहना बहुत मुश्किल है बाबूजी। मुझे अपना हक चाहिए।” बड़े बेटे
गर्मी की आहट के साथ ही बहुत से लोगों ने या तो एसी (AC) का उपयोग प्रारंभ कर दिया होगा
एयर कंडीशनर (AC): कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक सिद्धांत और देखरेख के उपाय (विज्ञान एवं तकनीक) Read Post »
मार्च, 2024 क्यों चर्चा में है ‘पॉपकॉर्न माइंड’? मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आजकल एक शब्द अत्यंत चर्चा में है—‘पॉपकॉर्न
मार्च, 2024 हमारे देश में शादी एक महत्वपूर्ण संस्कार है। कुछ समय पहले तक शादियां पूर्ण पारम्परिक तरीके से और
शादियों में बढ़ती फिजूलखर्ची और प्रदर्शन की होड़ (समसामयिक) Read Post »
मार्च, 2024 हमारी लोक संस्कृति में तो रूठे हुओं को ही नहीं बिना रूठे हुओं को भी मनाने का विधान
मार्च, 2024 वृद्धावस्था एक धीरे-धीरे आने वाली अवस्था है जो कि स्वभाविक व प्राकृतिक घटना है। वृद्ध का शाब्दिक अर्थ
मार्च, 2024 महानगर में हूं तो “कूलन में केलिन में बगर्यो बसंत है” का आभास तो दूर-दूर तक नहीं है।
मार्च, 2024 वसंत और स्त्री अलग कहां हैं? दोनों एक ही तो हैं! घर में बेटी आ जाए या बहू
मार्च, 2024 कहा जाता है कि जीवन में सफल होने के लिए आत्म-निरीक्षण एवं आत्म-परीक्षण बहुत आवश्यक है। कहावत है
मार्च, 2024 बबीता झा एक पुरानी कथा है—एक दिन एक कवि मिठाई की दुकान पर बैठकर मिठाई खा रहा था।
दिसंबर, 2023 बबीता झा बात बहुत पुरानी है। एक गाँव में एक किसान रहता था। वह अत्यंत ईर्ष्यालु और क्रोधी स्वभाव
दिसंबर, 2023 बबीता झा एक कमरे में चार दिये जल रहे थे। उस समय परिवार का कोई भी सदस्य कमरे में
सविता गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश दिसंबर, 2023 बाबा की चिड़िया बाबा की मैं चिड़िया “सोन चिड़िया’ बोल मेरी माई तेरा उड़ना मना।
दिसंबर, 2023 सारी उमर सोता रहा, पर नींद नहीं आई, बहुत गुस्सा आता रहा, देखकर उसकी रुसवाई! कोहबर सा जीवन
दिसंबर, 2023 श्रवण जैसा पुत्र धरा पर, इस जग में है आया। इसी धरा पर आज पूत ने, माँ-बाप को
दिसंबर, 2023 बाड़े के पशु से हो गए हैं हम, एक चौकोर सा घेरा अपनी चारो ओर खींच, घूमते उसके
दिसंबर, 2023 व्याकुल होकर तड़प रही हैं वृद्ध हुई अब मेरी नानी। ये दिन सब के ही आने हैं, इस
दिसंबर, 2023 जीवन एक गणित है प्यारे, सीखो तुम इसमें जीना। गुणा भाग कर आगे आओ, और रखो ताने सीना।।
दिसंबर, 2023 नवरात्रि के त्योहार में रखो देवी का उपवास। श्रद्धा भक्ति के साथ करो मां का पूजन खास।। प्रेम
दिसंबर, 2023 सागर गहरा कितना क्या है, मछुआरों ने ही समझा है। तेज हवा, लहरों से लड़ना, पतवारों की जीवटता
दिसंबर, 2023 या तो मुझसे यारी रख या फिर दुनियादारी रख। ख़ुद पर पहरेदारी रख अपनी दावेदारी रख। जीने की
दिसंबर, 2023 देश और समाज में वृद्धाश्रम खुलने की तेजी से बढ़ती जा रही रफ्तार, कहीं न कहीं हमको यह
दिसंबर, 2023 राजनीति के रंग भी बहुत इन्द्रधनुषी हैं। मगर कभी घटाटोप अंधेरे में राग एकलवन्ती भी। यों लम्बी पारियों
दिसंबर, 2023 सत्तो जिज्जी और पत्तो जिज्जी आजकल नामी लेखिका बनी बैठी हैं। पत्तो जिज्जी तो ज्यादातर घर-गृहस्थी में व्यस्त
दिसंबर, 2023 विभा और वैभव के विवाह को मुश्किल से पाँच वर्ष ही हुए थे कि दोनों के मध्य वैचारिक
दिसंबर, 2023 पीपल के पेड़ के नीचे बैठे उस वृद्ध भिक्षुक में न जाने ऐसा क्या था कि मां हर