मैं हिंदी हूँ, मैं भारत हूँ
सितंबर, 2025 मैं हिंदी हूँ, मैं भारत हूँ मेरा सम्मान करो। मैं गौरव हूँ इस भारत की मेरा गुणगान करो।।
सितंबर, 2025 मैं हिंदी हूँ, मैं भारत हूँ मेरा सम्मान करो। मैं गौरव हूँ इस भारत की मेरा गुणगान करो।।
सितंबर, 2025 हिंदी सिर्फ़ संवाद नहीं हिंदी हमारी संस्कृति हिंदी हमारी स्मृति हिंदी हमारी संवेदना पर हिंदी आज तो हेलो
सितंबर, 2025 जग में मेरी पहचान है हिंदी, जन जन को जोड़ रही है हिंदी। माँ का आँचल है हिंदी,
सितंबर, 2025 चप्पल और चरखा बोले एक दिन, ‘हमने ही रचा था इतिहास रे! न तलवार, न तख़्त, न ताज
सितंबर, 2025 दिन या रात चौबीसों घंटे उलझते रहता है चाहे कोई भी ऋतु, छींके से टंगे रहता है अंतिम
सितंबर, 2025 1. रामदुलारे त्रिवेदी ये महा नायक सकर्मक खादी धारक संघर्ष कारक परिवार पोषक राष्ट्रवाद संचारक स्वातंत्र्य बिगुल वादक
सितंबर, 2025 जब अधिकतर लोग अशिक्षित थे तो सभी अशिक्षितों के मन में एक कुण्ठा सदैव बनी रहती थी कि
सीताराम गुप्ता पीतमपुरा, दिल्ली सितंबर, 2025 जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो वह सीधे डॉक्टर के पास जाता
रोगों के निदान व उपचार की तरह ही ज़रूरी है समस्याओं के निदान के पश्चात ही उनका निराकरण Read Post »
सितंबर, 2025 बबीता झा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में लगभग दो अरब लोग एनीमिया से पीड़ित हैं।
सितंबर, 2025 भारत जो कभी सोने की चिड़िया कहलाता था, अपने ऐतिहासिक महत्व, व्यापारिक प्रसार, भौतिक संपन्नता और दार्शनिक संपदा
सितंबर, 2025 किसी भी देश की भाषा और साहित्य उस की सभ्यता और संस्कृति का दर्पण होता है। क्योंकि वहां
सितंबर, 2025 हिंदी भारत की रूह है। माथें की बिंदी है। भारतीय संस्कृतिक बहुभाषी है। जहां दस कोस पर भाषा
सितंबर, 2025 भारत को यदि “भाषाओं का उद्यान” कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां की विविधता केवल संस्कृति,
सितंबर, 2025 नमस्कार मित्रों जैसा कि आप सब जानते हैं कि राष्ट्रभाषा किसी भी देश को एकता के सूत्र में
बबीता झा सितंबर, 2025 वाल्मीकि रामायण में एक अत्यंत सुंदर प्रसंग आता है। श्री हनुमान जी सीता जी की खोज
जून, 2025 हिंसा, नफरत, क्रोध, इर्ष्या और द्वेष ये सभी भाव संवेग का प्रतिफल है। ऐसी धारणा थी पहले! लेकिन
बबीता झा जून, 2025 एक निर्धन व्यक्ति से एक मुस्लिम व्यक्ति कहता है कि उसे ‘वेटरनरी डॉक्टर’ को देने के
बबीता झा जून, 2025 बात वर्ष 1837 की है। इटली के फ्लोरेंस नगर में इन्फ्लूएंजा (Influenza) की भीषण महामारी फैली
फ्लोरेंस नाइटिंगेल: आधुनिक नर्सिंग एवं सांख्यिकी की मशाल (प्रेरक व्यक्तित्व) Read Post »
बबीता झा जून, 2025 एक नवविवाहित जोड़ा विवाह के पश्चात अपने नए घर में रहने आया। अगले दिन सुबह पत्नी
जून, 2025 बबीता झा एक अत्यंत धनी व्यक्ति का एक ही बेटा था। उस बालक को जीवन के सभी ऐशो-आराम
जून, 2025 सुधा देवी के पति का देहांत लगभग पंद्रह वर्ष पूर्व हो गया था, उन्होंने अकेले ही अपनी तीनों
जून, 2025 कुणाल के माता–पिता मध्यम वर्गीय परिवार से थे। कुणाल उनकी इकलौती संतान थी। जिसके कारण वे उसे बहुत
जून, 2025 रविवार का दिन, सुबह से दोपहर, दोपहर से शाम ढलने का वक्त हो रहा था। शैलेस घर से
जून, 2025 “कोई ऐ शाद पूछे या न पूछे इससे क्या मतलब, खुद अपनी कद्र करनी चाहिये साहब कमालों को”।
जून, 2025 हम देश की शक्ति और अभिमान हैं, सीमाओं के भावी वीर जवान हैं, भगत, सुभाष की कर्मभूमि के
जून, 2025 आओ फिर से भाग्य जगा लें, हृदय में अपने भाव सजा लें। चल पड़ें लंबी डगर पर दृढ़ता
जून, 2025 मैं जहाँ मौजूद था क्यों वहीं ग़ायब रहा। वो जो मुझ पर मर- मिटा क्यों मुझे दुश्मन लगा॥
जून, 2025 याद आ रही, गाँव की नदिया, शीतल पानी, बहती कलकल बढ़िया! मैं अरु कौसल, पप्पू, संपत के संग
जून, 2025 काश हम तुम बन जाते! कितने अच्छे हम हो जाते सरल नि:स्वार्थ ना अपेक्षा, बंधन मुक्त ना स्वेच्छा।
जून, 2025 जिद्दी मानव ही अपने जीवन में एक शानदार इतिहास लिखता है, भेड़चाल भरी धरती में वो सबसे अलग
जून, 2025 मंच व्यवस्था: 1. मम्मी (महिला) – आयु 58 वर्ष। 2. सूरज सिंह- आयु 61 वर्ष। 3. सुनील सिंह-
जून, 2025 गुरु और शिष्य की परंपरा सदियों पुरानी है। चाहे सतयुग, त्रेता या द्वापर युग हो, सभी युगों में
जून, 2025 हमारे समय में 11वीं में बोर्ड की परीक्षा के बाद में ही कॉलेज में दाखिला होता था। इसलिये
जून, 2025 वृद्धावस्था में प्रायः शरीर में लोच कम हो जाती है और हड्डियाँ भी अपेक्षाकृत कमज़ोर और भंगुर हो
बढ़ती उम्र में बुज़ुर्गों को बचाएँ बोन फ्रेक्चर से Read Post »
जून, 2025 पिछले दिनों भारतीय समाज में अलग ही उथल पुथल मची, जो स्त्री जननी, प्रेयसी, सहचरी और बहन के
जून, 2025 वर्तमान समय में अगर भारतीय समाज के बदलते स्वरूप पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि समाज में हो
समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियां: कारण और निवारण Read Post »
जून, 2025 प्रस्तावना वर्तमान समय में हिंसा एक विकराल सामाजिक समस्या बन चुकी है। समाज के प्रत्येक स्तर — चाहे
समाज में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति: कारण एवं निवारण Read Post »
जून, 2025 मानव समाज और हिंसा के पहलूओं पर विचार करें तो समाजशास्त्र की पुस्तक खोलते ही, जो पंक्ति सबसे
जून, 2025 वर्तमान में हिंसा के कुछ प्रमुख कारण हैं: घोर स्वार्थ, लोभ, लालच हिंसा के प्रमुख कारक इस आपाधापी