शब्दों की नीलामी
जून, 2026 शहर के बीचों-बीच एक प्रतिष्ठित साहित्यिक महोत्सव चल रहा था। बड़े-बड़े बैनर, चमकती रोशनी, और मंच पर नामी
जून, 2026 शहर के बीचों-बीच एक प्रतिष्ठित साहित्यिक महोत्सव चल रहा था। बड़े-बड़े बैनर, चमकती रोशनी, और मंच पर नामी
जून, 2026 (लेखक परिचय: 4 कविता संग्रह, 4 उपन्यास, 3 कहानी संग्रह, एक लघुकथा संग्रह, एक आलेख संग्रह और एक
जून, 2026 अट्ठाबीस दिनी रोचक फ़रवरी है ये? बड़ी सिरफिरी है, ठंड की जाती किरकिरी है। नपा-तुला कैलेंडर है। छोटा
जून, 2026 बिहार के एक छोटे-से कस्बे माधोपुर की एक तंग गली में ‘शब्द सागर’ नाम की छोटी दुकान थी।
जून, 2026 (कवि परिचय: भारतीय रेल सेवा से सेवानिवृत, स्वतंत्र लेखन। करीब 300 से अधिक कविताओं, आखिर क्या करता, देह
जून, 2026 (कवि परिचय: सेवानिवृत अभियंता, साहित्यकार। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में सतत लेखन कार्य। पहले तो बस यही पढ़ा था, ‘म’
तेरा कर्ज चुकाना कठिन है माँ (मातृत्व दिवस पर विशेष) Read Post »
जून, 2026 हाँ बेटा, मैं तुझे अंधेरे से बचाना चाहता हूँ, जीवन के कुछ मूल सूत्र समझाना चाहता हूँ। ये
जून, 2026 (कवयत्री परिचय: साझा काव्य संकलनों के अतिरिक्त विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं एवं वैबसाइट में अनवरत प्रकाशन। रचनाओं
जून, 2026 देखो क्या क्या बदल गया, और देखो क्या बदल रहा। संवेदना हुई रेत, सहृदयता हो गई ढेर। देखो
जून, 2026 सुनो लड़कियों! ध्यान से सुनो… अपना आसमान खुद चुनो तुम भावी पीढ़ी की प्रतिनिधि हो सुनो वर्तमान पीढ़ी
जून, 2026 मैं औरत हूँ, मैं सच कह रही हूँ, कोई कुछ बोलता क्यों नहीं, बस जानते हैं, मेरे सामने
जून, 2026 मेरे बिना कहाँ है संभव, किसी समाज का निर्माण, ये बात और है कि पहले नहीं था किसी
जून, 2026 हे शहीद! तुम आज भी जिंदा हो मां की उदास नम आंखों में, पत्नी की मेहंदी मिटाते आंसुओं
जून, 2026 (कवयत्री परिचय: अवकाशप्राप्त हिंदी विभागाध्यक्ष, हिंदी, मैथिली एवं अँग्रेजी की साहित्यकार, मैथिली उपन्यास ‘किस्त-किस्त जीवन’ के लिए साहित्य
जून, 2026 मंगल-मंगल मंगल-मंगल जंगल-जंगल जंगल-जंगल छम-छम नाच रहा मोर बड़ा टक-टक देख रहा हंस खड़ा कुहू-कुहू कूक रही कोयल
जून, 2026 हमारा घर ध्यान रहे मित्रों मकान नहीं घर क्योंकि मकान बनता है ईंट रेत सीमेंट से और घर
जून, 2026 बुजुर्ग हमारे घर के रक्षक संस्कृति के संरक्षक। दया, धर्म क्षमाशीलता के संवर्धक। क्या इनका बूढ़ा होकर जिंदा
जून, 2026 पुष्करराय जोषी गुजरात हाउसिंग बोर्ड कनकोट पटिया, कावेद रोड, राजकोट वृद्ध की धूंधली आँखों में खुल रहा है
जून, 2026 गुज़ारे न गुज़रे दिन- अपनों के बिन। परायों की भीड़ कभी छॅंटी न। अपनों में वह कभी बॅंटी
जून, 2026 विरासत की झोली में कभी संस्कार उगते थे, आज उसी झोली में दस्तख़त खोजे जाते हैं। कल जिन
जून, 2026 मन मासूम भटकता फिरता, और भावनाएँ कुम्हलाईं। बचपन ने बचपन है खोया, सोशल में खोई तरुणाई।। मोबाइल वात्सल्य
जून, 2026 बातों में जब खींचातानी। कहना- सुनना है बेमानी। वो आगे, हम पीछे कैसे, सोच हमारी है बचकानी। जैसा
जून, 2026 (कवि परिचय: सहायक प्राध्यापक, साहित्यकार, अभिनेता, भोजपुरी फिल्मों के निर्देशक। 2 कहानी संग्रह, 2 काव्य संग्रह, एक एकांकी,
जून, 2026 पूरक आपस में सदा, धर्म और विज्ञान। नहीं विरोधी मानिए, तज ज़हरीली तान॥ मनसा- वाचा- कर्मणा, सदाचार व्यवहार।
जून, 2026 जीवन-झरने से अगर सुनना है संगीत, राग-द्वेष का आयतन कम कर दे तू मीत। सुख दुख मान अपमान
जून, 2026 1 हम किसी से अगर नहीं मिलते। लोग सब इस क़दर नहीं मिलते। मंज़िले आसपास हैं लेकिन, रास्ते
जून, 2026 (सीएलएफ़ गीत) चलो फिर गीत गाते हैं, जरा फिर मुस्कुराते है, है तन का जोर बेशक कम, उमंगो
जून, 2026 “पहला सुख निरोगी काया”— यह कहावत आज के आधुनिक युग में सबसे सटीक बैठती है। मानव शरीर एक
जून, 2026 देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों
राजनीति के पल-पल बदलते समीकरण: चुनावी गणित का जोड़-घटाव Read Post »
जून, 2026 हम बहुत से वरिष्ठजन नियमित रूप से सबेरे के समय मैदान में बैठ आपस मे किसी भी विषय
वसुन्धरा को हर-भरा रखने में हम वरिष्ठों का प्रयास Read Post »
जून, 2026 ‘यूँ ही बेसबब ना फिरा करो’ ‘परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता, किसी भी आइने में
पुस्तक: मोहपाश जून, 2026 मोह पाश! मोह पाश! मोह पाश! दिल के सागर में भावों का सुनामी ला दिया मोह
जून, 2026 (कवयत्री परिचय: जीवन के रंग, संवेदनाओं के रंग आदि पुस्तकें और अनेक पत्र-पत्रिकाओं में अनवरत लेखन मैं बड़ी
जून, 2026 प्रस्तावना मैं यह सोचता हूं कि मनुष्य ने जब पहली बार अपनी अनुभूतियों को शब्द दिए होंगे, तब
साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना, सृजन और उपभोक्तावादी समय का द्वंद्व Read Post »
जून, 2026 साहित्य कभी मनुष्य के भीतर की उस नमी का नाम था, जो समय के कठोरतम पत्थरों पर भी
साहित्य में बाज़ारवाद: संवेदना और उपभोग के बीच झूलता शब्दलोक Read Post »
जून, 2026 आधुनिक भारत में साहित्य एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ उसकी आत्मा और उसका बाज़ार आमने-सामने दिखाई
साहित्य में बाज़ारवाद : शब्दों का सौदा या समाज का आईना Read Post »
जून, 2026 सुप्रसिद्ध कवि श्री हरिवंश राय बच्चन ने क्या खूब कहा है ‘बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं
बबीता झा जून, 2026 एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक असुर की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे
साहित्य में बाज़ारवाद: धन का स्वरूप और नैतिक दायित्व Read Post »
मार्च 2026 (लेखक परिचय: साहित्यकार एवं समाजसेवी। योग और एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ। 13 दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें, 4 दर्जन से
मार्च 2026 ऐसी जगहों पर आपका चेहरा नहीं आपके गले में लटकता प्रतिनिधि कार्ड आपके बहुत नहीं तो कुछ ही