गुरूदेव
सितंबर 2026 उत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार। गढ़ें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार॥ वाणी में गुरुदेव की,
सितंबर 2026 उत्तम हो संसार में, बच्चों का व्यवहार। गढ़ें गुरुदेव प्रेम से, शिक्षा शुभ संस्कार॥ वाणी में गुरुदेव की,
सितंबर 2026 1 मैं बदलना चाहता हूँ, अब संभलना चाहता हूँ। तीरगी, वीरानियों से, बच निकलना चाहता हूँ। जो रहे
सितंबर 2026 धूप छूना चाहती है मेरे आँगन को हर रोज़। धूप चूमना चाहती है आँगन की तुलसी को हर
सितंबर 2026 सोच रहा आज देश के हाल पर लिखें। जन जन के भीतर तम और ताप पर लिखें। लिखने
सितंबर 2026 दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जो साथ में रहते हुए भी अपना दुःख एक-दूसरे से नहीं कह
सितंबर 2026 जिसे छिपाना श्रेयस्कर है, उसे छपाकर ख़ुश हैं लोग जिसे जला जग दीपित होता, उसे बुझाकर ख़ुश हैं
सितंबर 2026 “तूने क्या नहीं दिखाया, ज़िंदगी! तूने क्या नहीं सिखाया, ज़िंदगी!” पल-पल गिरना, गिरकर फिर उठना, उठकर चलना, चलकर
सितंबर 2026 फैशन के मकड़जाल में फँस गया हिंदुस्तान, पश्चिमी फैशन पर कर रहा आज यह गुमान। अपने वजूद को
सितंबर 2026 राग-द्वेष से हो रहित, जीवन की यह नाव; क्षणभंगुर जीवन मिला, तज शकुनि-सम दाँव। पीतल कितना लो रगड़,
सितंबर 2026 आज़ादी के नाम पे युवा, करें हदें सब पार, नव पीढ़ी की भाषा से अब, हार गए संस्कार!
सितंबर 2026 ऋचा सिंह वाल्मीकि नगर, पश्चिम चंपारण (बिहार) अब बातों में वह बात कहाँ, जो कभी ख़तों में हुआ
सितंबर 2026 बदल गई है बातों की भाषा, बदल गया संवाद, शब्द वही हैं, अर्थ नए हैं, नया हुआ अंदाज़।
सितंबर 2026 प्रीति की उम्र अभी सिर्फ दस साल ही थी मगर वह अपनी माँ के काम में पूरा हाथ
सितंबर 2026 अमृता प्रीतम पंजाबी भाषा की एक प्रसिद्ध कवयित्री हैं। उन्हें पंजाबी भाषा की पहली अग्रणी कवयित्री, उपन्यासकार और
अमृता प्रीतम और उनकी मार्मिक पुकार ‘वारिसशाह नूँ’ Read Post »
सितंबर 2026 बचपन में एक कहावत अक्सर सुनते थे— “वर्षा से जल, जल से वृक्ष, वृक्ष से बादल, बादल से
सितंबर 2026 राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस भारतीय इतिहास का एक ऐसा गौरवपूर्ण अवसर है, जो हमें स्वतंत्रता संग्राम की महान
सितंबर 2026 विविधताओं से भरे हुए मेरे प्यारे भारत देश की संस्कृति बहुरंगी है; क्योंकि यहाँ हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख,
सितंबर 2026 मनुष्य को ईश्वर ने चिंतनशील प्राणी बनाया है। प्रश्न यह है कि मनुष्य कैसे अपने चिंतन और व्यवहार
मनुष्यता ही अहिंसा का पाठ पढ़ाती व सबसे बड़ा धर्म Read Post »
सितंबर 2026 भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह किसी समाज के संस्कार, संवेदना, सोच और उसके बदलते सामाजिक
सितंबर 2026 “ओए, कहाँ है?” “घर पे!” “कब आएगा?” “IDK” (I don’t know) “चल, शिकंजी पीने चलें।” “मैं नहीं आ
सितंबर 2026 भाषा मनुष्य की सबसे बड़ी सांस्कृतिक खोजों में से एक है। मनुष्य ने जब पहली बार अपनी अनुभूति
सितंबर 2026 भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है; वह एक पीढ़ी की सोच, संस्कार और समय की आत्मा होती
सितंबर 2026 भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, मनुष्य के भीतर से दूसरे मनुष्य तक जाने वाली वह महीन डोर
सितंबर 2026 प्रस्तावना भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं है। वह मनुष्य की स्मृति, संवेदना, संस्कृति, विचार और सामाजिक अनुभवों
नई पीढ़ी की भाषा : बदलते समय, समाज और संचार के संदर्भ में एक अध्ययन Read Post »
सितंबर 2026 प्रस्तावना शब्द किसी संपदा से कम नहीं होते, इसलिए इस संपदा का सोच-विचार कर ही व्यय करना चाहिए।
सितंबर 2026 प्रस्तावना जब अपशब्दों का प्रयोग ‘सभ्य और आधुनिक’ होने का प्रतीक बनने लगे, तो यह केवल भाषा का
रुद्राभिषेक की शीतल धार में अपना सारा दर्द बहा आई हूँ, “ॐ नमः शिवाय” की गूँज में अपना मन आपको
बेटियाँ जब घर आती हैं, तो सिर्फ़ खुशियाँ नहीं लातीं— माँ-बाप की पूरी दुनिया अपने साथ ले आती हैं। “माँ…”
बबीता झा जून, 2026 11 जून से फुटबॉल का विश्व कप 2026 प्रारंभ हो चुका है, जो 19 जुलाई तक
‘द किंग’ पेले: द ब्यूटीफुल गेम के जादुई बादशाह (प्रेरक व्यक्तित्व) Read Post »
बबीता झा जून, 2026 “स्वाभिमान से जीने के लिए पढ़ाई करो, पाठशाला ही इंसानों का सच्चा गहना है।’ उठो, जागो
जून, 2026 अंजली खेर भोपाल संकल्प के कमरे का दरवाजा खोलते ही वीणा का मन कसैला सा हो गया। कितना
जून, 2026 एक बार एक व्यक्ति ने महान दार्शनिक सुकरात से पूछा कि “सफलता पाने का रहस्य क्या है?” सुकरात
जून, 2026 एक व्यक्ति को एक पेड़ के तने पर तितली का कोकून (खोल) दिखाई दिया। उसने देखा कि उसमें
जून, 2026 सुभाषिनी ज्यादा पढ़ी लिखी तो नहीं थी लेकिन घरेलू कार्यों में निपुण थी और चर्चित परिवार का साया
यह प्रसंग उस समय का है जब गांधीजी देश को आजाद कराने के आंदोलन में पूरी तरह सक्रिय थे। एक
जून, 2026 ‘’कावेरी ओ कावेरी’’ मंगला ने आवाज लगाई ‘कहाँ खो जाती हो तुम बार-बार, मंदिर नहीं चलना है क्या।’
जून, 2026 यह कहानी मैंने किसी के मुँह से नहीं सुनी है, ना ही किसी कॉफी हाउस में बैठकर चुस्कियाँ
जून, 2026 अपनों के बीच आज अपना खुद का शहर अपरिचित हो चुका है। यह बहुत पुरानी बात नहीं है।