मैं खाली नहीं थी
मुझे खाली समझने की भूल मत करना! मैं खाली नहीं थी… मैंने ख़ुद को खाली किया था— अपनों के लिए!
मुझे खाली समझने की भूल मत करना! मैं खाली नहीं थी… मैंने ख़ुद को खाली किया था— अपनों के लिए!
जीवन के रंगमंच पर अलग-अलग वय आईं चली गई अपना अपना करतब दिखा के अब अंतिम प्रस्तुति में व्यस्त हैं
दिसंबर, 2025 दुनिया हिला दूंगा, सब कुछ जला दूंगा टाइप का एटीट्यूड रखने वाले जेन जी एक तबका नेपाल में
दिसंबर, 2025 अभी हाले हाल कोर्ट में जूता फिंका तो बबाल मच गया, हाय तौबा मच गई? जूता ‘लेदर’ का
दिसंबर, 2025 शारदा बी अकेली पड़ गई। उम्र अभी हावी नहीं हुई थी। पति की मौत के बाद गांव में
दिसंबर, 2025 (लेखक परिचय: अभी तक आपकी 4 कविता संग्रह, 4 उपन्यास, 3 कहानी संग्रह, एक लघुकथा संग्रह, एक आलेख
दिसंबर, 2025 ‘आखिर उसने जो कहा, कर ही डाला’ मंच-मंच पर हमने नेताओं का रूप बदल ते, पार्टी बदलते और
दिसंबर, 2025 (लेखिका परिचय: आप हिन्दी और मैथिली भाषा में विविध साहित्यिक विधाओं में लेखन कार्य करती हैं। मैथिली में
दिसंबर, 2025 अभी कल की ही तो बात है जब मैं आम दिनों की तरह सोशल मीडिया से संबंधित एक
दिसंबर, 2025 वो चाहता तो उसे नज़रअंदाज करके आगे बढ़ सकता था। वो चाहता तो उसे जेब में रखकर भी
दिसंबर, 2025 (लेखिका परिचय: 10 कहानी संग्रह, एक आत्मकथा, 4 उपन्यास, और 4 कविता संग्रह नीरजा जी के रचना साहित्य
दिसंबर, 2025 देवकुँवर तीस साल की उम्र में माँ बनी थी। हीरा जैसा हीरा लाल बेटा मिला था। फिर ईश्वर
दिसंबर, 2025 ये किशोर उम्र के लड़के सच में अलग ही होते है बड़े बनना भी चाहते हैं बड़े बन
दिसंबर, 2025 छोड़ दो शब्दों को स्वतंत्र, बिना दुराव छिपाव बिना घुमाव, कहने दो अपनी बात सरल और सीधी शब्दों
दिसंबर, 2025 हर एक शब् की तासीर तो तीरगी ही है फिर चाहे, तीरगी मद्धम हो या मुकम्मल ख़ुदा ही
दिसंबर, 2025 तन्हाइयों में हमेशा ही रहने लगे अब हम नई पीढ़ी के साथ रहकर अकेले हुए हम ये उम्र
दिसंबर, 2025 मेरा एक बेटा और एक बेटी है सोच रहा हूँ…. दोनों की शादी समय पर करा दूँ इसी
दिसंबर, 2025 जरा और यौवन के संधिपत्र पर वक्त करता है जब हस्ताक्षर… तो होता है घटित कभी संकुचन, कभी
दिसंबर, 2025 सहेजता हूँ रोज़ कुछ ख़्वाबों को, टूटता हूँ फिर भी चुप रहता हूँ। पढ़ाई का बोझ, नौकरी की
दिसंबर, 2025 (कवयत्री परिचय: विदेश में रहते हुए भी देश की धरती और लोगों से आपका आत्मिक जुड़ाव, डॉक्टर होने
दिसंबर, 2025 किसी प्रसूता से पूछो दर्द के पीछे की खुशी का एहसास वह कहेगी बहुत अद्भुत होता है यह
दिसंबर, 2025 कैसे भूलूं अपने गांव को उस पीपल के छांव को।। बैठ जहां पर करते थे कितनी सारी बातें
दिसंबर, 2025 कहाँ अब आसमानों की कमी है। परों में ही उड़ानों की कमी है। सड़क को देखकर सोचा किये
दिसंबर, 2025 (कवि परिचय: देश-विदेश के प्रमुख समाचार-पत्र व पत्रिकाओं में रचनाओं का अनवरत प्रकाशन। ‘कौन कहता है’ (2017), ‘पाण्डे
दिसंबर, 2025 (कवि परिचय: तीन काव्य संग्रह “दरिया सूखकर सहरा हुआ है”, “असलियत में चांद मेरे पास है” और “उर
दिसंबर, 2025 पार्क के बेंच पर हर रोज़ घंटों -घंटों तक। दिन के 24 घंटे से लड़ाई करता है। धीरे-धीरे
दिसंबर, 2025 सर्द हवाएं और ठंड से ठिठुरन अनंत आशाओं, अरमानों का गुंजन कर रहे हैं हम सब नववर्ष का
दिसंबर, 2025 बुजुर्ग हमारे घर के रक्षक संस्कृति के संरक्षक। दया, धर्म क्षमाशीलता के संवर्धक। क्या इनका बूढ़ा होकर जिंदा
दिसंबर, 2025 कभी धूप कभी छाँव से भरी जीवन की सुनहरी भोर कब साँझ में ढल गई काया हो चली
दिसंबर, 2025 सूखी पड़ी है बंजर धरती। दाने–दाने के लाले पड़ गए।। गाँव बिका, जमीन बिकी, जाने लोग, किसके पाले
दिसंबर, 2025 (कवि परिचय: आप साहित्यकार के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। योग और एक्यूप्रेशर के द्वारा भी लोगों को स्वस्थ्य
दिसंबर, 2025 चिढ़ और ग़ुस्से की अभिव्यक्ति मधुर व्यंग्य की प्रविधियों में नफ़रती तजुर्बों की अभिव्यक्ति प्यार के शिल्प में
दिसंबर, 2025 सुनो वन्धुगण सुन प्रिय मीत नशामुक्ति हित गाओ गीत मन भरमाये घर ये उजाड़े सकल जगत का चैन
दिसंबर, 2025 (कवि परिचय: शिक्षा से यांत्रिक अभियन्ता, सेवानिवृत आईएसएस एवं आईआरएसएस अधिकारी, वर्तमान में अनेक विभागों में मध्यस्थ (arbitrator)
दिसंबर, 2025 हो प्रबल इच्छा न कुछ दु:साध्य है। आज का पुरुषार्थ कल का भाग्य है।। फूँक पावन शंख शिव
दिसंबर, 2025 वर्ष 2025 महिला खिलाड़ियों के लिए स्वर्णिम काल साबित हुआ है। इस एक वर्ष में महिला खिलाड़ियों ने
महिला सशक्तीकरण की नयी मिसाल: खेलों में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी और जीत (समसामयिक) Read Post »
दिसंबर, 2025 “हरि अनंत हरि कथा अनंता…” भक्ति साहित्य में जब-जब तुलसीदास जी का नाम लिया जाता है, तब-तब उनके
दिसंबर, 2025 आप सभी ने अपने दादा, दादी, नाना, नानी को वृद्ध होते देखा होगा यानि छोटेपन से उनके साथ